बस या चलता-फिरता खतरा? कासगंज में टूटा फर्श, बुझ गई 5 साल की ज़िंदगी

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के ढोलना इलाके से आई यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, सिस्टम की चुप्पी का चार्जशीट है। रोज की तरह स्कूल बस बच्चों को घर छोड़ने निकली थी। लेकिन इस बार सफर मंज़िल तक नहीं, मातम तक पहुंचा।

बस का फर्श अचानक टूट गया। UKG में पढ़ने वाली 5 साल की बच्ची सीधे सड़क पर जा गिरी और इससे पहले कि कोई समझ पाता, वह बस के पिछले पहिए के नीचे आ चुकी थी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। एक स्कूल वैन, जो बच्चों को भविष्य तक पहुंचाने का वादा करती है, उसी ने आज एक भविष्य छीन लिया।

बस या कबाड़? फिटनेस पर उठे बड़े सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बस काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। फर्श पहले से कमजोर था, लेकिन बच्चों को उसी में बैठाकर सड़क पर उतार दिया गया। सवाल यह है कि क्या फिटनेस सर्टिफिकेट सिर्फ कागज़ का खिलौना बन चुका है?

परिजनों का कहना है कि बच्ची अपने बड़े भाई के साथ सफर कर रही थी। भाई ने ड्राइवर को बस रोकने के लिए आवाज दी, लेकिन वक्त किसी के इंतजार में नहीं रुकता। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

गुस्से में उबला इलाका, सड़क जाम

हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने सड़क जाम कर स्कूल प्रबंधन और ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कुछ देर के लिए इलाके में तनाव की स्थिति भी बन गई। लोगों का साफ कहना है कि अगर समय रहते बस की जांच होती, तो आज एक घर उजड़ने से बच जाता।

पुलिस जांच में जुटी, लेकिन जवाब कौन देगा?

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। बस को कब्जे में ले लिया गया है और ड्राइवर से पूछताछ जारी है। स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच हो रही है।

प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन हर बार यही बयान आता है, और हर बार किसी मासूम की कीमत चुकानी पड़ती है।

Bigger Question: स्कूल सेफ्टी सिर्फ सर्कुलर तक सीमित क्यों?

भारत में स्कूल बस सुरक्षा को लेकर गाइडलाइंस मौजूद हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर कागज़ी नियमों से अलग होती है। सवाल यह है कि क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा सिर्फ मीटिंग्स और नोटिस बोर्ड तक सीमित है?

यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन सभी माता-पिता के लिए चेतावनी है जो रोज अपने बच्चों को स्कूल बस में बिठाते हैं।

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